Dimag Tez Karne Ki Dua: आज की तेज़-तर्रार ज़िंदगी में हर इंसान चाहता है कि उसका दिमाग तेज़ चले, बातें जल्दी याद हों और जहन इतना रोशन हो कि पढ़ाई, इबादत और काम हर चीज़ में आसानी हो।
इस्लाम हमें हर छोटी-बड़ी ज़रूरत के लिए अल्लाह तआला की तरफ रूजू करने की हिदायत देता है। कुरआन और हदीस में ऐसी कई दुआएं मिलती हैं जो इंसान के जहन को तेज़, दिल को रोशन और ज़बान को फसीह बनाती हैं
इन्हीं में से एक खास दिमाग तेज करने की दुआ है, जो की इस आर्टिकल में हम आपके साथ शेयर करेंगे। साथ ही इसका सही तर्जुमा, फज़ीलत और पढ़ने का तरीका भी बताएंगे ताकि आप इसे आसानी से समझ सकें।
📝 दिमाग तेज करने की दुआ हिंदी में
रब्बिश रह ली सदरी व यासिर ली अमरी वहलुल ‘उकदतन मिल्लीसानी याफकाहू कव्ली
🕌 Dimag Tez Karne Ki Dua in Arabic
رَبِّ اشْرَحْ لِي صَدْرِي وَيَسِّرْ لِي أَمْرِي وَاحْلُلْ عُقْدَةً مِنْ لِسَانِي يَفْقَهُوا قَوْلِي
🔤 Dimag Tez Karne Ki Dua in Roman English
Rabbish rahli sadri wa yasirli amri wah lul uqdatan millisaani, yaf kahu kawli
✨ दुआ का तर्जुमा
“ऐ मेरे परवरदिगार! तू मेरे सीने को कुशादा कर, मुझे हिम्मत दे, मेरा काम आसान कर दे और मेरी ज़बान की गिरह खोल दे ताकि लोग मेरी बात अच्छे से समझ सकें।”
🌟 दिमाग तेज करने की दुआ की फज़ीलत
- यह दुआ कुरआन से है, इसलिए इसमें बरकत और असर है।
- इसे लगातार पढ़ने से जहन साफ, याददाश्त मजबूत और काम आसान हो जाते हैं।
- स्टूडेंट्स और बच्चों के लिए यह बेहद फायदेमंद है।
- दुआ इल्म, समझ और फहम में बरकत लाती है।
🙏 दुआ पढ़ने का तरीका
- हर नमाज़ के बाद इस दुआ को 14 बार पढ़ें।
- फिर 11 मरतबा रब्बी जिद्द्नी इल्मा इस दुआ को पढ़ें
- पढ़ने के बाद हाथों पर दम करें।
- फिर हाथों को अपने चेहरे, सर और आंखों पर फेर लें।
- लगातार पढ़ने से इंशा’अल्लाह याददाश्त और जहन में बेहतरी आएगी।
❓ FAQ – Dimag Tez Karne Ki Dua
दिमाग तेज करने की दुआ कितनी बार पढ़नी चाहिए?
हर नमाज़ के बाद 14 बार पढ़ना अफज़ल है।
क्या यह दुआ बच्चों के लिए भी पढ़ सकते हैं?
जी हां, माता-पिता बच्चों के लिए यह दुआ पढ़कर उन पर दम कर सकते हैं।
असर कब से शुरू होगा?
जब आप इसे यकीन और तवक्कल के साथ पढ़ेंगे, असर उसी दिन से महसूस होने लगेगा।
📌 Conclusion
इस आर्टिकल में हमने आपके साथ दिमाग तेज करने की दुआ शेयर की जो जहन को तेज और याददाश्त को मजबूत करने के लिए बेहद मुफीद है।
याद रखिए इल्म और दिमागी काबिलियत अल्लाह तआला का नेमत है। जब हम कुरआन और दुआ के ज़रिए अल्लाह से मदद मांगते हैं, तो वह हमारे लिए रास्ते आसान कर देता है।
इस दुआ को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाइए हर रोज़ पढ़ते रहिए। इंशा’अल्लाह, इल्म में बरकत, जहन में रोशनी और जिंदगी में कामयाबी हासिल होगी।